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चतरा में जमीन के एक मामले ने फिर खड़े किए रिकॉर्ड की सुरक्षा पर सवाल

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चतरा में जमीन के एक मामले ने फिर खड़े किए रिकॉर्ड की सुरक्षा पर सवाल
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भू-हदबंदी वाद का आदेश दूसरे पक्ष के नाम ऑनलाइन करने का आरोप, जांच में जुटा डीसीएलआर कार्यालय

चतरा (संजीत मिश्रा)। चतरा में जमीन से जुड़े एक मामले ने सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा और ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर), चतरा के न्यायालय से जुड़े भू-हदबंदी वाद का है। एक पक्ष ने आरोप लगाया है कि उसके पक्ष में पारित आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे पक्ष का नाम दर्ज कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

नवादा बरैनी गांव निवासी प्रवीण कुमार सिंह ने अधिकारियों को आवेदन देकर मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में भू-हदबंदी वाद संख्या 04/2024-25 तथा 02/2024-25 का उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 अगस्त 2025 को राजस्व कर्मचारी, अंचल निरीक्षक और अंचल अधिकारी, चतरा की ओर से उपलब्ध कराए गए जांच प्रतिवेदन में विपक्षी के दावे को सही नहीं माना गया था।

प्रवीण कुमार सिंह का कहना है कि डीसीएलआर न्यायालय से उनके पक्ष में पारित आदेश की प्रमाणित प्रति उन्हें 14 मई 2026 को मिल चुकी थी। इसके बावजूद आरोप है कि 6 अगस्त 2026 तक उक्त आदेश को ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।

दूसरे पक्ष के नाम ऑनलाइन रिकॉर्ड होने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्यालय में जानकारी लेने पर संबंधित कर्मी प्रमोद कुमार ने बताया कि मामला गीता देवी और उपेंद्र कुमार यादव के नाम से ऑनलाइन हो चुका है।

इसके बाद सवाल उठने लगा कि अगर न्यायालय का आदेश एक पक्ष के पक्ष में पारित हुआ था और उसकी प्रमाणित प्रति भी मिल चुकी थी, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे पक्ष का नाम किस आधार पर दर्ज हुआ।

शिकायत में न्यायालय के आदेश से जुड़ी फाइल में कागजात हटाने और कथित बदलाव की बात भी कही गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

मामले को लेकर वर्तमान डीसीएलआर कार्यालय की ओर से संबंधित कर्मियों की भूमिका की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में मूल फाइल, न्यायालय के आदेश और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान किया जाना अहम माना जा रहा है।

जमीन के विवाद आज के समय में लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गलती या कथित छेड़छाड़ आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

फिलहाल सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। जांच के बाद ही साफ होगा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे पक्ष का नाम कैसे दर्ज हुआ और इसके पीछे लापरवाही थी या कोई और वजह।

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Ankit Pandey

Ankit Pandey ✔ Verified

पद: REPORTER

यह खबर Ankit Pandey द्वारा तथ्यों की पुष्टि (Fact-checked) के बाद पब्लिश की गई है। इनकी सभी ख़बरें यहाँ पढ़ें »

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✍️ रिपोर्ट: Ankit Pandey
दिनांक: 08 Aug 2026

चतरा में जमीन के एक मामले ने फिर खड़े किए रिकॉर्ड की सुरक्षा पर सवाल

भू-हदबंदी वाद का आदेश दूसरे पक्ष के नाम ऑनलाइन करने का आरोप, जांच में जुटा डीसीएलआर कार्यालय

चतरा (संजीत मिश्रा)। चतरा में जमीन से जुड़े एक मामले ने सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा और ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर), चतरा के न्यायालय से जुड़े भू-हदबंदी वाद का है। एक पक्ष ने आरोप लगाया है कि उसके पक्ष में पारित आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे पक्ष का नाम दर्ज कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

नवादा बरैनी गांव निवासी प्रवीण कुमार सिंह ने अधिकारियों को आवेदन देकर मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में भू-हदबंदी वाद संख्या 04/2024-25 तथा 02/2024-25 का उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 अगस्त 2025 को राजस्व कर्मचारी, अंचल निरीक्षक और अंचल अधिकारी, चतरा की ओर से उपलब्ध कराए गए जांच प्रतिवेदन में विपक्षी के दावे को सही नहीं माना गया था।

प्रवीण कुमार सिंह का कहना है कि डीसीएलआर न्यायालय से उनके पक्ष में पारित आदेश की प्रमाणित प्रति उन्हें 14 मई 2026 को मिल चुकी थी। इसके बावजूद आरोप है कि 6 अगस्त 2026 तक उक्त आदेश को ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।

दूसरे पक्ष के नाम ऑनलाइन रिकॉर्ड होने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्यालय में जानकारी लेने पर संबंधित कर्मी प्रमोद कुमार ने बताया कि मामला गीता देवी और उपेंद्र कुमार यादव के नाम से ऑनलाइन हो चुका है।

इसके बाद सवाल उठने लगा कि अगर न्यायालय का आदेश एक पक्ष के पक्ष में पारित हुआ था और उसकी प्रमाणित प्रति भी मिल चुकी थी, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे पक्ष का नाम किस आधार पर दर्ज हुआ।

शिकायत में न्यायालय के आदेश से जुड़ी फाइल में कागजात हटाने और कथित बदलाव की बात भी कही गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

मामले को लेकर वर्तमान डीसीएलआर कार्यालय की ओर से संबंधित कर्मियों की भूमिका की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में मूल फाइल, न्यायालय के आदेश और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान किया जाना अहम माना जा रहा है।

जमीन के विवाद आज के समय में लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गलती या कथित छेड़छाड़ आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

फिलहाल सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। जांच के बाद ही साफ होगा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे पक्ष का नाम कैसे दर्ज हुआ और इसके पीछे लापरवाही थी या कोई और वजह।

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