बाल विवाह के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक कदम
धनबाद। बाल विवाह के खिलाफ देशभर में चलाए जा रहे अभियान को उस समय बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की दिशा में प्रस्ताव पारित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 4 सितंबर 2026 के कार्यक्रम में इस विषय पर प्रस्ताव पर कार्रवाई दर्ज है।
धनबाद में बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे बाल अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ट्रस्ट, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) के सहयोगी संगठन के रूप में बाल विवाह रोकथाम के लिए काम कर रहा है।
भारत से उठी आवाज बनी वैश्विक संकल्प
शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट के निदेशक शंकर रवानी ने कहा कि भारत से उठी आवाज आज पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। उन्होंने कहा कि यह भारत और उन तमाम संगठनों के लिए गर्व का क्षण है, जो वर्षों से बाल विवाह के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 27 नवंबर 2024 को भारत सरकार ने नागरिक समाज संगठनों के साथ ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। अब संयुक्त राष्ट्र की पहल ने इस अभियान को वैश्विक मंच प्रदान किया है।
“यह जश्न मनाकर रुक जाने का समय नहीं है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह से मुक्त बचपन मिले। जब तक जिले के किसी गांव का एक भी बच्चा बाल विवाह के डर में जी रहा है, हमारी लड़ाई अधूरी है।”
धनबाद में 1,500 बाल विवाह रुकवाने का दावा
शंकर रवानी ने बताया कि धनबाद में सरकार और प्रशासन के सहयोग से कानूनी हस्तक्षेपों के जरिए लगभग 1,500 बाल विवाह रुकवाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि केवल कानून के सहारे बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने का काम भी किया गया है।
धर्मगुरुओं और शिक्षकों को बनाया अभियान का हिस्सा
बाल विवाह के खिलाफ अभियान में धर्मगुरुओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों, पुलिसकर्मियों और समुदाय के लोगों को जोड़ने पर भी जोर दिया गया। ट्रस्ट का कहना है कि सामूहिक भागीदारी से ही बाल विवाह के खिलाफ अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
JRC की पहल को वैश्विक पहचान
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु लंबे समय से बाल विवाह के खात्मे के लिए अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की मांग करते रहे हैं। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने इस पहल को फिर प्रमुखता से उठाया। इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत समेत करीब 50 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा।
देश के 782 जिलों में अभियान
JRC के अनुसार, उसके सहयोगी संगठन देश के 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। सरकार, प्रशासन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी एवं वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ा गया है।
संगठन के अनुसार, उसके सहयोगी संगठनों के प्रयासों से देशभर में 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए गए हैं।
बाल विवाह की दर में भी आई कमी
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली लड़कियों का अनुपात NFHS-5 (2019-21) में 23.3 प्रतिशत था, जो NFHS-6 (2023-24) में घटकर 20.1 प्रतिशत बताया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-5 के लक्ष्य 5.3 में बाल विवाह सहित कम उम्र और जबरन विवाह जैसी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करने पर जोर दिया गया है।
अखबार के लिए प्रमुख हाइलाइट्स
▪ 27 नवंबर को बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस
▪ संयुक्त राष्ट्र महासभा में 4 सितंबर को प्रस्ताव पर कार्रवाई
▪ धनबाद में करीब 1,500 बाल विवाह रुकवाने का दावा
▪ JRC के सहयोगी संगठनों ने देशभर में 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाने की बात कही
▪ JRC के अनुसार 782 जिलों में चल रहा अभियान
▪ बाल विवाह के खिलाफ कानून के साथ जागरूकता और सामाजिक भागीदारी पर जोर
▪ NFHS-5 में 23.3% से NFHS-6 में 20.1% हुआ बाल विवाह का आंकड़ा
▪ लक्ष्य—2030 तक बाल विवाह जैसी हानिकारक प्रथाओं का अंत
नोट: अखबार में प्रकाशित करने से पहले “NFHS-6 (2023-24)” के 20.1% आंकड़े और “5.50 लाख/1,500 बाल विवाह” के आंकड़ों को संबंधित संस्था/सरकारी स्रोत से अंतिम रूप से सत्यापित करना बेहतर रहेगा। इससे खबर की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
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