भाजपा नेता राजेश सिंह की नानी सोहबतिया देवी का निधन,श्मशान घाट पर बरगद का पौधा लगाकर दी अंतिम विदाई
कान्हाचट्टी: भाजपा नेता राजेश सिंह की नानी का निधन, स्मृति में श्मशान घाट पर लगाया बरगद का पौधा
कान्हाचट्टी। प्रखंड के कोल्हैया गांव निवासी भाजपा नेता राजेश सिंह और समाजसेवी राकेश सिंह की नानी सोहबतिया देवी (85 वर्ष) का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) की वजह से हुए उनके आकस्मिक निधन की खबर से पूरे प्रखंड में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को ही स्थानीय श्मशान घाट पर पूर्ण सनातन विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां इलाके के सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
अंतिम विदाई में पेश की पर्यावरण संरक्षण की मिसाल इस दुखद घड़ी में भी परिवार ने समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का काम किया। भाजपा नेता राजेश सिंह ने अपनी दिवंगत नानी की स्मृतियों को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से श्मशान घाट परिसर में बरगद का एक पौधा रोपा।
इस दौरान भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि नानी जी का वात्सल्य, संस्कार और आशीर्वाद परिवार के साथ हमेशा रहेगा। श्मशान घाट पर लगाया गया यह बरगद का वृक्ष अपनी विशालता के साथ उनकी पावन स्मृतियों को सदैव जीवंत रखेगा और आने वाली पीढ़ियों को छांव देगा।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई गणमान्य लोग सोहबतिया देवी की अंतिम यात्रा में समाज के हर वर्ग की भागीदारी रही। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण इस दौरान मौजूद रहे। श्मशान घाट पर उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकाकुल परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य व संबल प्रदान करने की ईश्वर से कामना की।
शोक को सृजन में बदलने की एक अनुकरणीय पहल
आमतौर पर श्मशान घाट को जीवन के अंतिम सत्य और गहरे अवसाद की जगह माना जाता है। अपनों को खोने का दुख इंसान को भीतर तक तोड़ देता है, लेकिन इस असीम पीड़ा के बीच भी समाज को एक नई दिशा देना एक गहरी सोच का परिचायक है। भाजपा नेता राजेश सिंह द्वारा अपनी नानी की स्मृति में बरगद का पौधा लगाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति और स्मृतियों को जोड़ने का एक बेहद खूबसूरत और सार्थक प्रयास है।
बरगद का वृक्ष अपनी दीर्घायु, मजबूत जड़ों और घनी छांव के लिए जाना जाता है। ठीक उसी तरह, जैसे हमारे बुजुर्गों का आशीर्वाद और उनके संस्कार हमारे जीवन को आधार देते हैं। मृत्यु भले ही शरीर का अंत हो, लेकिन एक पौधा लगाकर किसी के जीवन को प्रकृति के रूप में पुनर्जीवित किया जा सकता है। जब यह पौधा कल एक विशाल वृक्ष बनेगा, तो इसकी छांव में न सिर्फ राहगीरों को सुकून मिलेगा, बल्कि सोहबतिया देवी जी की यादें भी हमेशा हरी रहेंगी।
पर्यावरण संकट के इस दौर में, अगर समाज का हर व्यक्ति अपने परिजनों की जन्मतिथि या पुण्यतिथि पर ऐसे ही वृक्षारोपण का संकल्प ले, तो यह उनके प्रति सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी। दुख की घड़ी में सृजन और पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश समाज के अन्य लोगों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है।
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