दो जन्म प्रमाण पत्रों को लेकर विवाद गहराया, नगर विकास विभाग से जांच की मांग
चतरा। नगर परिषद अध्यक्ष अताउर रहमान उर्फ बाबू भाई के बच्चों से जुड़े जन्म प्रमाण पत्रों को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आया है। शिकायतकर्ता अमन कुमार ने 1 सितंबर को नगर विकास एवं आवास विभाग के अपर सचिव जुल्फिकार अली के समक्ष आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की है। शिकायत के साथ उन्होंने कुछ दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं, जिनके आधार पर कई सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके पास उपलब्ध दो जन्म प्रमाण पत्र एक ही बच्चे से संबंधित हैं, लेकिन दोनों में माता-पिता का विवरण अलग-अलग दर्ज है। शिकायत के अनुसार, एक प्रमाण पत्र में बच्चे के पिता का नाम अताउर रहमान तथा माता का नाम सूफिया प्रवीण अंकित है, जबकि दूसरे प्रमाण पत्र में पिता का नाम जाहुल राशिद और माता का नाम नूरजहां खातून दर्ज है। हालांकि, यह दावा शिकायतकर्ता का है और इसकी पुष्टि सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही हो सकेगी।
अस्पताल के सत्यापन पत्र का भी हवाला
शिकायत में जीवन अनमोल हॉस्पिटल, हजारीबाग के संचालक सुबोध कुमार गुप्ता द्वारा नगर निगम हजारीबाग के मेयर को भेजे गए सत्यापन पत्र का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पत्र में अस्पताल प्रबंधन ने संबंधित जन्म प्रमाण पत्र को अस्पताल द्वारा जारी नहीं किया जाना बताया है।
सत्यापन पत्र के अनुसार, 21 जून 2018 को नूरजहां खातून के अस्पताल में भर्ती होने अथवा प्रसव कराने का कोई रिकॉर्ड अस्पताल के प्रसव रजिस्टर में उपलब्ध नहीं है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2018 में अस्पताल की पंजीयन संख्या 2036000245 थी, जबकि विवादित जन्म प्रमाण पत्र में 2036000264 अंकित है। शिकायतकर्ता ने इन तथ्यों को भी जांच का आधार बनाया है।
जांच में स्पष्ट होंगे तथ्य
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि दोनों जन्म प्रमाण पत्र वास्तव में एक ही बच्चे के हैं, तो उनमें माता-पिता का विवरण अलग-अलग दर्ज होना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। वहीं यदि दोनों प्रमाण पत्र अलग-अलग बच्चों के हैं, तो उनकी वास्तविक पहचान एवं जन्म संबंधी अभिलेखों की जांच आवश्यक है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि नगर परिषद अध्यक्ष के नामांकन के दौरान दाखिल शपथ पत्र में दो बच्चों का उल्लेख किया गया था, जबकि अन्य दस्तावेजों में तीन बच्चों का रिकॉर्ड सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विभाग के समक्ष सौंपे गए दस्तावेज
अमन कुमार ने दोनों जन्म प्रमाण पत्रों सहित अन्य संबंधित दस्तावेज नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब विभाग द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन, संबंधित निकायों एवं अस्पताल से अभिलेखों की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल मामले में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। दस्तावेजों की प्रामाणिकता, उनमें दर्ज तथ्यों तथा किसी भी संभावित अनियमितता की अंतिम पुष्टि केवल सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही हो सकेगी।
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