लावालौंग के 10 गांवों में दो माह के भीतर पहुंचेगी बिजली, सांसद कालीचरण सिंह की पहल पर मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
चतरा: चतरा लोकसभा क्षेत्र के लावालौंग प्रखंड के कई गांव वर्षों से बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। अब इन गांवों के लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। क्षेत्रीय सांसद कालीचरण सिंह की पहल पर झारखंड सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगले दो माह के भीतर विद्युतीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार सांसद कालीचरण सिंह ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को पत्र सौंपकर लावालौंग प्रखंड के उन गांवों की स्थिति से अवगत कराया, जहां आजादी के दशकों बाद भी बिजली नहीं पहुंच सकी है। पत्र में बताया गया है कि सौरू, सिलदाग, बनवार, भूषाढ़, साम्भे, मंडवा, टीकदा, कटीलीमईयाँ, मन्धनिया और पासागन समेत कई गांव आज भी अंधेरे में जीवन गुजार रहे हैं। इन गांवों में अधिकांश आबादी अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की है, जिन्हें बिजली नहीं होने के कारण रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि बिजली के अभाव का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शाम ढलते ही गांव अंधेरे में डूब जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में कठिनाई होती है। वहीं किसानों, छोटे व्यवसायियों और ग्रामीणों के दैनिक कार्य भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने सरकार से इन गांवों में शीघ्र विद्युतीकरण कराने की मांग की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने ऊर्जा विभाग के मुख्य अभियंता को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। निर्देश में कहा गया है कि संबंधित गांवों में अगले दो माह के भीतर बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द विद्युत सुविधा उपलब्ध हो सके।
सांसद कालीचरण सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का समुचित विकास तभी संभव है जब हर गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचें। उन्होंने कहा कि बिजली केवल रोशनी का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास की आधारशिला है। उनकी प्राथमिकता है कि चतरा लोकसभा क्षेत्र का कोई भी गांव विकास से अछूता न रहे।
ग्रामीणों ने भी सांसद की पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि वर्षों से चली आ रही उनकी परेशानी अब खत्म होगी। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर बिजली पहुंच जाती है तो बच्चों की शिक्षा, किसानों के कार्य और ग्रामीणों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू होने के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित दो माह की समयसीमा के भीतर इन गांवों में वास्तव में बिजली पहुंचती है या नहीं। यदि ऐसा होता है तो यह लावालौंग प्रखंड के इन गांवों के लिए लंबे इंतजार के बाद विकास की नई शुरुआत होगी।
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