संसद में गूंजा टंडवा-सिमरिया कोयला परिवहन मुद्दा, सांसद कालीचरण सिंह ने समर्पित कोल कॉरिडोर की मांग उठाई
सड़क दुर्घटनाओं, प्रदूषण और जाम की समस्या का संसद में उठाया मुद्दा, सरकार से स्थायी समाधान की अपील
चतरा | Voice of Chatra Desk
चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह ने संसद के मानसून सत्र के दौरान नियम 377 के अंतर्गत टंडवा, सिमरिया, चतरा और आसपास के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में अनियंत्रित कोयला परिवहन से उत्पन्न जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से आम यातायात से अलग समर्पित कोल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने की मांग करते हुए कहा कि ऊर्जा उत्पादन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा भी है।
सांसद ने सदन को बताया कि टंडवा, सिमरिया, गिद्धौर और चतरा क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी कोयला वाहनों का परिचालन होता है। इन वाहनों के कारण प्रमुख सड़कों पर लगातार दबाव बना रहता है, जिससे आम लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति का सबसे अधिक असर छात्रों, मरीजों, कर्मचारियों, किसानों और छोटे वाहन चालकों पर पड़ रहा है।
सड़क हादसों और जनहानि पर जताई चिंता
सांसद कालीचरण सिंह ने कहा कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने इस स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि विकास कार्यों की कीमत स्थानीय लोगों के जीवन से नहीं चुकाई जा सकती। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक व्यवस्था की आवश्यकता है।
कोयले की धूल से बढ़ रहा प्रदूषण
संसद में अपने वक्तव्य के दौरान सांसद ने कोयला ढुलाई से फैल रहे वायु प्रदूषण का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि खुले वाहनों से उड़ने वाली कोयले की धूल आसपास के गांवों तक पहुंच रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों तथा श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है।
खेती और जलस्रोत भी हो रहे प्रभावित
उन्होंने कहा कि कोयले की धूल केवल हवा को ही प्रदूषित नहीं कर रही, बल्कि खेतों और जलस्रोतों पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। बारिश के दौरान धूल जलाशयों और नदियों तक पहुंच रही है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ने की आशंका बनी रहती है। वहीं खेतों पर धूल जमने से कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
रेल और कन्वेयर बेल्ट आधारित परिवहन को मिले बढ़ावा
सांसद ने सुझाव दिया कि सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए कोयला परिवहन में रेल नेटवर्क, कन्वेयर बेल्ट और अन्य आधुनिक परिवहन प्रणालियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि इससे सड़क दुर्घटनाओं, जाम और प्रदूषण जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जाएं ठोस कदम
उन्होंने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित पानी का छिड़काव, कोयला वाहनों को तिरपाल से ढककर परिवहन सुनिश्चित करने, प्रदूषण की नियमित निगरानी तथा पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने और श्वसन रोगों के उपचार की विशेष व्यवस्था करने पर भी बल दिया।
विकास और जनहित में बने संतुलन
अपने संबोधन के अंत में सांसद कालीचरण सिंह ने कहा कि चतरा और आसपास के कोयला क्षेत्र देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। लेकिन विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उसके साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी सुनिश्चित हों। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि टंडवा, सिमरिया और आसपास के क्षेत्रों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए शीघ्र ठोस पहल की जाये ।
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