निजी कॉल वायरल होने के विवाद पर विधायक का पुलिस एसोसिएशन पर पलटवार, बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी
पुराने मामले में जमानत के लिए न्यायालय पहुंचे विधायक, बरवाड्डा थाना प्रभारी से बातचीत को बताया निजी मामला
अपशब्दों पर जताया खेद, बोले- निजी बातचीत सार्वजनिक करने वाले पर भी हो कार्रवाई
चतरा। पुराने मामले में जमानत के सिलसिले में न्यायालय पहुंचे विधायक ने वायरल ऑडियो को लेकर पुलिस एसोसिएशन की ओर से की जा रही गिरफ्तारी की मांग पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विधायक ने कहा कि बरवाड्डा थाना प्रभारी के साथ हुई बातचीत पूरी तरह निजी थी। उनका आरोप है कि निजी बातचीत को सार्वजनिक कर वायरल किया गया।
विधायक के अनुसार, मामला बिना प्रशासनिक अनुमति के सभा आयोजित करने से जुड़ा है। इसी मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और वह जमानत की प्रक्रिया के सिलसिले में न्यायालय पहुंचे थे।
वायरल ऑडियो को लेकर विधायक ने रखा अपना पक्ष

विधायक ने कहा कि थाना प्रभारी के साथ बातचीत निजी थी। बातचीत के दौरान गुस्से में उनके मुंह से कुछ अमर्यादित शब्द निकले होंगे, जिसके लिए उन्होंने खेद जताया। हालांकि उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच पर उन्होंने किसी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी नहीं की है।
उन्होंने पुलिस एसोसिएशन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि निजी बातचीत को लेकर कार्रवाई की मांग की जा रही है, तो उस थाना प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग होनी चाहिए, जिसने कथित तौर पर निजी बातचीत को सार्वजनिक किया।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विधायक ने पुलिस एसोसिएशन को घेरा
विधायक ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी ईमानदार पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ है। उन्होंने रवि कुमार से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए करोड़ों रुपये के कथित ट्रेजरी घोटाले का आरोप लगाया।
विधायक ने दावा किया कि कथित तौर पर घोटाले की राशि निजी ड्राइवर के भाई के बैंक खाते में मंगाई गई थी। उन्होंने पुलिस एसोसिएशन से सवाल किया कि क्या ऐसे मामलों की जानकारी उन्हें नहीं है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की जाती।
गिरफ्तारी की मांग पर विधायक ने दी आंदोलन की चेतावनी
विधायक ने कहा कि उन्हें जेल जाने का डर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि यदि दबाव में उनकी गिरफ्तारी की जाती है, तो उनके समर्थक झारखंड के विभिन्न थानों में भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। विधायक ने जेल जाने की स्थिति में भी आंदोलन जारी रखने की बात कही।
पुरानी गलती का भी किया जिक्र
अपनी बात रखते हुए विधायक ने बोकारो की एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक बार गुस्से में उन्होंने किसी का मोबाइल फोन पटक दिया था। विधायक ने कहा कि वह अपनी इस गलती को सार्वजनिक मंचों से कई बार स्वीकार कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि गलती होने पर उसे स्वीकार करने में उन्हें कोई संकोच नहीं है। लेकिन वर्तमान विवाद में उनका सवाल यह है कि निजी बातचीत को सार्वजनिक किसने किया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।
आम लोगों के साथ पुलिस के व्यवहार पर उठाए सवाल
विधायक ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस उसे घर से पकड़कर थाने लाई और लॉकअप में उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी उंगली टूट गई।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं और नेताओं को भी कई बार निशाना बनाया जाता है। गिरिडीह के एक युवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उचित जांच के बिना प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बकाया वेतन का मुद्दा उठाया
विधायक ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बोकारो समेत कई क्षेत्रों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को पिछले छह से आठ महीने से वेतन नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से धरना दे रहे हैं और अपनी समस्याओं को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक पहुंचा चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
विधानसभा में उठाएंगे कर्मचारियों के वेतन का मामला
विधायक ने कहा कि वह विधानसभा सत्र में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बकाया वेतन का मुद्दा उठाएंगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलना गंभीर समस्या है और सरकार को जल्द भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
उन्होंने एक महीने के भीतर कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान की दिशा में पहल करने की बात कही।
शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग का विरोध
विधायक ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्ति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य आम लोगों से सीधे जुड़े संवेदनशील क्षेत्र हैं।
उन्होंने कहा कि इन विभागों में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए स्थायी और जवाबदेह व्यवस्था होनी चाहिए। स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को आउटसोर्सिंग पर निर्भर करने के बजाय सरकार को नियमित नियुक्ति की दिशा में काम करना चाहिए।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का दावा
अपनी बात रखते हुए विधायक ने स्पष्ट किया कि वायरल ऑडियो के विवाद के बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निजी बातचीत के विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय भ्रष्टाचार, कर्मचारियों के बकाया वेतन और आम लोगों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।
विधायक के बयानों के बाद अब वायरल ऑडियो को लेकर पुलिस एसोसिएशन और विधायक के बीच विवाद और गहराने के आसार हैं। मामले में आगे पुलिस प्रशासन और संबंधित पक्षों की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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