केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे से मिले सांसद प्रतिनिधि, पिपरवार - आम्रपाली क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की उठाई मांग
कोल कॉरिडोर निर्माण, अशोक वेस्ट परियोजना शुरू कराने, विस्थापितों को न्याय और स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत रोजगार की मांग
पिपरवार, 31 जुलाई। पिपरवार एवं आम्रपाली क्षेत्र की वर्षों पुरानी जनसमस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने के उद्देश्य से सांसद प्रतिनिधि दिलीप कुमार अम्बष्ट ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के सरकारी आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े सात सूत्रीय मांगपत्र मंत्री को सौंपते हुए शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया।
मुलाकात के दौरान दिलीप कुमार अम्बष्ट ने कहा कि उत्तर कर्णपुरा कोलफील्ड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पिपरवार, आम्रपाली और आसपास के गांव लंबे समय से सड़क सुरक्षा, रोजगार, विस्थापन और आधारभूत सुविधाओं जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन मुद्दों का समयबद्ध समाधान क्षेत्र के हजारों परिवारों के हित में आवश्यक है।
कोयला परिवहन के लिए कोल कॉरिडोर बनाने की मांग
मांगपत्र में सबसे प्रमुख मुद्दा टंडवा–सिमरिया मुख्य मार्ग पर कोयला परिवहन के लिए अलग कोल कॉरिडोर के निर्माण का रखा गया। बताया गया कि वर्तमान में भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण सड़क पर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है, जिससे आम लोगों की जान-माल को खतरा बना रहता है। अलग कॉरिडोर बनने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और दुर्घटनाओं पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
अशोक वेस्ट परियोजना जल्द शुरू करने का आग्रह
सांसद प्रतिनिधि ने लंबे समय से बंद पड़ी अशोक वेस्ट परियोजना को शीघ्र प्रारंभ कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि परियोजना चालू होने से देश के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
विस्थापित गांवों को न्याय दिलाने की मांग
मांगपत्र में आम्रपाली परियोजना से प्रभावित ग्राम पोकला उर्फ कसियाडीह को आधिकारिक रूप से विस्थापित गांव घोषित करने की मांग की गई। बताया गया कि भूमि अधिग्रहण और परियोजना विस्तार के बावजूद गांव को अब तक विस्थापित गांव का दर्जा नहीं मिल पाया है, जिससे प्रभावित परिवार कई सरकारी सुविधाओं और पुनर्वास योजनाओं से वंचित हैं।
इसके अलावा परसान टोला के विस्थापितों पर आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की भी मांग रखी गई। अम्बष्ट ने कहा कि प्रभावित परिवार लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनके साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत रोजगार की मांग
सांसद प्रतिनिधि ने झारखंड सरकार की विस्थापन नीति का हवाला देते हुए कोयला परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि जिन क्षेत्रों की भूमि और संसाधनों का उपयोग औद्योगिक विकास के लिए किया जा रहा है, वहां के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सीएसआर योजनाओं से गांवों के विकास पर जोर
मांगपत्र में यह भी आग्रह किया गया कि कंपनियों द्वारा संचालित सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामुदायिक भवन, खेल मैदान और अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास कराया जाए, ताकि गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने सांसद प्रतिनिधि द्वारा प्रस्तुत सभी मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने संबंधित मामलों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया।
बैठक के बाद सांसद प्रतिनिधि दिलीप कुमार अम्बष्ट ने कहा कि क्षेत्र के विकास, विस्थापित परिवारों के अधिकार और स्थानीय युवाओं के भविष्य से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार के समक्ष विस्तार से रखा गया है। उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर पिपरवार–आम्रपाली क्षेत्र के लोगों को राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
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