10वीं बार रक्तदान कर पंकज कुमार साहू ने बचाई गर्भवती महिला की जान, युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
लावालौंग (चतरा)। समाज सेवा का सबसे बड़ा रूप यदि किसी को कहा जाए तो वह है समय पर किया गया रक्तदान। चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड अंतर्गत बांदू गांव निवासी पंकज कुमार साहू ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक गर्भवती महिला की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने आवश्यकता की सूचना मिलते ही बिना किसी देर किए अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया। यह उनका 10वां स्वैच्छिक रक्तदान है।
जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला को तत्काल ओ पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। परिजनों द्वारा रक्त की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे थे, तभी इसकी सूचना पंकज कुमार साहू तक पहुंची। उन्होंने तुरंत घर से निकलकर अस्पताल पहुंचने का निर्णय लिया और रक्तदान कर महिला के उपचार में सहयोग किया। समय पर उपलब्ध हुए रक्त से चिकित्सकों को इलाज में सुविधा मिली और परिजनों ने राहत की सांस ली।
पंकज कुमार साहू लंबे समय से स्वैच्छिक रक्तदान से जुड़े हुए हैं। वे केवल स्वयं रक्तदान ही नहीं करते, बल्कि आसपास के युवाओं को भी नियमित रूप से रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहते हैं। उनका मानना है कि रक्तदान किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा उपहार हो सकता है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद को नया जीवन मिलता है।
विशेष बात यह भी है कि पंकज जिस क्षेत्र से आते हैं, वह कभी नक्सल प्रभावित इलाकों में गिना जाता था। ऐसे क्षेत्र से निकलकर समाज सेवा की राह चुनना इस बात का प्रमाण है कि आज गांवों के युवा सकारात्मक सोच के साथ समाज में बदलाव लाने का कार्य कर रहे हैं। वे अपने कार्यों से यह संदेश दे रहे हैं कि जागरूक युवा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
साधारण किसान परिवार से आने वाले पंकज कुमार साहू के पिता का अब निधन हो चुका है। परिवार की आजीविका कृषि कार्य पर निर्भर है। सीमित संसाधनों के बावजूद वे सामाजिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हैं और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहते हैं।
रक्तदान के बाद पंकज ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है और शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी की पूर्ति कर देता है। उन्होंने कहा कि यदि हर स्वस्थ व्यक्ति समय-समय पर रक्तदान करे तो किसी भी मरीज को रक्त के अभाव में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पंकज कुमार साहू का यह मानवीय प्रयास न केवल एक परिवार के लिए उम्मीद बना, बल्कि समाज के सामने यह उदाहरण भी प्रस्तुत करता है कि इंसानियत की पहचान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि जरूरत के समय किए गए कार्यों से होती है। उनका यह दसवां रक्तदान चतरा जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।
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