बसोरिया में रैयत-विस्थापितों की पहली बैठक, रोजगार और मुआवजे के मुद्दे पर हुई चर्चा
धारिया-जोबा बस्ती में जुटे ग्रामीण, स्थानीय युवाओं को नौकरी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की उठी मांग
धनबाद: बसोरिया के धारिया-जोबा बस्ती में रविवार को रैयत विस्थापित मोर्चा की पहली बैठक हुई। बैठक में आसपास के रैयत और विस्थापित परिवारों के लोग शामिल हुए। इस दौरान जमीन, रोजगार और मुआवजे से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई। लोगों ने कहा कि जिनकी जमीन परियोजनाओं में गई है, उन्हें समय पर मुआवजा और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए।
भागीरथ रवानी बोले- रैयतों के हक की लड़ाई जारी रहेगी
मोर्चा के अध्यक्ष भागीरथ रवानी ने कहा कि संगठन का गठन रैयत और विस्थापित परिवारों की आवाज उठाने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को संबंधित विभाग और प्रबंधन के सामने रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर आगे आंदोलन भी किया जाएगा।
स्थानीय नियोजन पर जोर, BCCL से जल्द मुआवजे की मांग
बैठक में महामंत्री विकास रवानी, उपाध्यक्ष भीम प्रमाणिक, सचिव पंकज यादव, महासचिव रमेश बाउरी, कोषाध्यक्ष राजू रजक और मुख्य प्रवक्ता चन्द्र शेखर पाठक ने भी अपनी बात रखी। सभी ने एक स्वर में कहा कि STG आउटसोर्सिंग में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और BCCL प्रभावित परिवारों के लंबित मुआवजे का जल्द भुगतान किया जाए।
एकजुट रहने की अपील, कई लोग रहे मौजूद
बैठक के अंत में सभी लोगों ने संगठन को मजबूत बनाने और रैयत-विस्थापितों के हित के लिए मिलकर काम करने का निर्णय लिया। इस मौके पर मीडिया प्रभारी गणेश टुडू, रविन्द्र राम, मुकेश रवानी, बाबर अली, प्रताप रवानी सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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