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पीएम मोदी ने जंतर-मंतर विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बोले- बच्चों को सजा नहीं, सही राह दिखाएं

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पीएम मोदी ने जंतर-मंतर विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बोले- बच्चों को सजा नहीं, सही राह दिखाएं
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नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुई घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुछ बच्चों ने सार्वजनिक मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें तथा उनकी दिवंगत माता को अपशब्द कहे, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने नाराजगी के बजाय बच्चों को माफ करने और उन्हें सही रास्ता दिखाने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश-दुनिया ने जंतर-मंतर पर जो कुछ देखा, वह दुर्भाग्यपूर्ण था। कुछ बच्चों ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया, जिसे सुनकर हर सभ्य व्यक्ति आहत होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गालियां दी गईं और उनकी स्वर्गीय माता का भी अपमान किया गया। इसके बावजूद उनके मन में किसी के प्रति बदले की भावना नहीं है।

"बचपन में गलतियां होती हैं, सुधार का मौका भी मिलना चाहिए"

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन में गलतियां होना स्वाभाविक है। असली जिम्मेदारी समाज की है कि वह बच्चों को डांटने या सजा देने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाए। उन्होंने कहा कि समाज में इस घटना को लेकर लोगों का आक्रोश स्वाभाविक है, लेकिन केवल गुस्से से हालात नहीं बदलेंगे।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने गलत शब्दों का इस्तेमाल किया, वे गुमराह हैं। ऐसे बच्चों को अदालतों के चक्कर लगवाना, उन्हें समाज में अपमानित करना या पूरी जिंदगी के लिए अपराधी बना देना किसी समस्या का समाधान नहीं है।

"मैं उन बच्चों को माफ करता हूं"

प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह उन सभी बच्चों को माफ करते हैं। उन्होंने समाज से भी अपील की कि इन बच्चों को दूसरा मौका दिया जाए। उनका कहना था कि अगर बच्चे गलती कर रहे हैं तो उन्हें समझाना और सही रास्ते पर लाना बड़ों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने एक सरल उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार गलती से दांत के नीचे जीभ आ जाती है और खून भी निकल आता है, लेकिन कोई अपने दांत नहीं तोड़ता, क्योंकि दांत भी अपने हैं और जीभ भी अपनी है। ठीक उसी तरह देश के बच्चे भी अपने ही हैं। उनसे नाराज होने के बजाय उन्हें संभालना और आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है।

देश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे अहम

प्रधानमंत्री ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाला समय युवाओं का है। उन्होंने बच्चों और युवाओं से कहा कि वे अपनी गलतियों से सीखें, नए सपने देखें और देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि देश का हर युवा अपने जीवन में आगे बढ़े, अपने परिवार और समाज का नाम रोशन करे। उन्होंने दोहराया कि वे देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

सकारात्मक संदेश के साथ किया संबोधन समाप्त

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नफरत, गाली और कटुता से किसी का भला नहीं होता। उन्होंने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे गलतियों से सीखें, आगे बढ़ें और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि "आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं, जहां बच्चों को डर नहीं, सही दिशा मिले और हर युवा अपने सपनों को साकार कर देश की तरक्की में भागीदार बने।"


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SUDHIR KUMAR

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पद: CHIEF EDITOR

यह खबर SUDHIR KUMAR द्वारा तथ्यों की पुष्टि (Fact-checked) के बाद पब्लिश की गई है। इनकी सभी ख़बरें यहाँ पढ़ें »

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✍️ रिपोर्ट: SUDHIR KUMAR
दिनांक: 31 Jul 2026

पीएम मोदी ने जंतर-मंतर विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बोले- बच्चों को सजा नहीं, सही राह दिखाएं

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुई घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुछ बच्चों ने सार्वजनिक मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें तथा उनकी दिवंगत माता को अपशब्द कहे, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने नाराजगी के बजाय बच्चों को माफ करने और उन्हें सही रास्ता दिखाने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश-दुनिया ने जंतर-मंतर पर जो कुछ देखा, वह दुर्भाग्यपूर्ण था। कुछ बच्चों ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया, जिसे सुनकर हर सभ्य व्यक्ति आहत होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गालियां दी गईं और उनकी स्वर्गीय माता का भी अपमान किया गया। इसके बावजूद उनके मन में किसी के प्रति बदले की भावना नहीं है।

"बचपन में गलतियां होती हैं, सुधार का मौका भी मिलना चाहिए"

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन में गलतियां होना स्वाभाविक है। असली जिम्मेदारी समाज की है कि वह बच्चों को डांटने या सजा देने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाए। उन्होंने कहा कि समाज में इस घटना को लेकर लोगों का आक्रोश स्वाभाविक है, लेकिन केवल गुस्से से हालात नहीं बदलेंगे।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने गलत शब्दों का इस्तेमाल किया, वे गुमराह हैं। ऐसे बच्चों को अदालतों के चक्कर लगवाना, उन्हें समाज में अपमानित करना या पूरी जिंदगी के लिए अपराधी बना देना किसी समस्या का समाधान नहीं है।

"मैं उन बच्चों को माफ करता हूं"

प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह उन सभी बच्चों को माफ करते हैं। उन्होंने समाज से भी अपील की कि इन बच्चों को दूसरा मौका दिया जाए। उनका कहना था कि अगर बच्चे गलती कर रहे हैं तो उन्हें समझाना और सही रास्ते पर लाना बड़ों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने एक सरल उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार गलती से दांत के नीचे जीभ आ जाती है और खून भी निकल आता है, लेकिन कोई अपने दांत नहीं तोड़ता, क्योंकि दांत भी अपने हैं और जीभ भी अपनी है। ठीक उसी तरह देश के बच्चे भी अपने ही हैं। उनसे नाराज होने के बजाय उन्हें संभालना और आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है।

देश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे अहम

प्रधानमंत्री ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाला समय युवाओं का है। उन्होंने बच्चों और युवाओं से कहा कि वे अपनी गलतियों से सीखें, नए सपने देखें और देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि देश का हर युवा अपने जीवन में आगे बढ़े, अपने परिवार और समाज का नाम रोशन करे। उन्होंने दोहराया कि वे देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

सकारात्मक संदेश के साथ किया संबोधन समाप्त

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नफरत, गाली और कटुता से किसी का भला नहीं होता। उन्होंने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे गलतियों से सीखें, आगे बढ़ें और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि "आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं, जहां बच्चों को डर नहीं, सही दिशा मिले और हर युवा अपने सपनों को साकार कर देश की तरक्की में भागीदार बने।"


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