लालच का ज़हर: चतरा में अफीम तस्करी में महिलाओं की बढ़ती संलिप्तता ने बढ़ाई चिंता
722 ग्राम अफीम बरामद, पुलिस पहुंचने से पहले महिला तस्कर फरार; एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज
चतरा: जिले में अफीम की खेती, भंडारण और तस्करी के खिलाफ चतरा पुलिस लगातार अभियान चला रही है। इसके बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर अवैध कारोबार को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। अब इस नेटवर्क में महिलाओं की सक्रियता भी सामने आने लगी है, जिसने प्रशासन के साथ-साथ समाज की चिंता बढ़ा दी है।
ताजा मामला लावालौंग थाना क्षेत्र के बुलबुल गांव का है, जहां गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर 722 ग्राम अफीम बरामद किया। हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले महिला तस्कर मौके से फरार हो गई। पुलिस ने उसके बैंक पासबुक को भी जब्त कर जांच शुरू कर दी है तथा गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई
सिमरिया एसडीपीओ शुभम भाऊ साहेब ने बताया कि पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी को सूचना मिली थी कि बुलबुल गांव निवासी एक महिला अपने घर में अफीम छिपाकर बिक्री की तैयारी कर रही है। सूचना के सत्यापन के बाद विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। तलाशी के दौरान एक स्टील के केन में छिपाकर रखा गया 722 ग्राम अफीम बरामद हुआ। मामले में लावालौंग थाना में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
तस्करों पर सख्त कार्रवाई जारी
एसडीपीओ ने कहा कि चतरा पुलिस जिले में अफीम की खेती, भंडारण और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। अवैध कारोबार में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि ऐसी गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें, ताकि समाज को नशे के जाल से बचाया जा सके।
संपादकीय दृष्टि: लालच का यह रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जाता है
कुछ पैसों के लालच में लोग ऐसा रास्ता चुन रहे हैं, जो केवल उनके अपने भविष्य को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को भी नुकसान पहुंचाता है। नशे का अवैध कारोबार किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला है।
अब तक ऐसे मामलों में अधिकतर पुरुषों की संलिप्तता सामने आती थी, लेकिन हाल के घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि कुछ महिलाएं भी इस अवैध कारोबार का हिस्सा बन रही हैं। यह स्थिति और अधिक चिंताजनक है, क्योंकि महिलाएं परिवार और समाज की आधारशिला मानी जाती हैं। यदि वे भी इस अपराध की श्रृंखला में शामिल होती हैं, तो इसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है।
अफीम की खेती और तस्करी के खिलाफ प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है, लेकिन केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। समाज, परिवार और प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि ऐसे अवैध कार्यों का विरोध करें और कानून का साथ दें। आसान कमाई का लालच अंततः विनाश, अपराध और बर्बादी की ओर ही ले जाता है।
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